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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन
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श्लोक d10
श्लोक
12.220.d10
येभ्यस्त्वं मन्यसे दातुं मामिहानय तान् द्विजान्।
तादृशं तं पतिं तेषु वरयिष्ये यथातथम्॥
अनुवाद
जिन ब्राह्मणों को तुम मुझे सौंपना चाहते हो, उन सबको बुला लो। मैं उनमें से अपनी इच्छानुसार योग्य वर चुन लूँगी।
Call all the Brahmins to whom you want to hand me over. I will choose a suitable husband from amongst them as per my choice.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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