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mahabharat 12.220.9-11: अब मैं उन लक्षणों का वर्णन करूँगा, जिनका अपना-अपना कारण है। कृपणता का अभाव, उत्साह का अभाव, संतोष, श्रद्धा, क्रोध का अभाव, नित्य सरलता, अधिक न बोलना, अभिमान का त्याग, गुरु की सेवा, किसी के गुणों में दोष न देखना, सब प्राणियों पर दया करना, किसी की चुगली न करना, लोक-लाज, मिथ्याभाषण और निन्दा का त्याग, सत्पुरुषों की संगति की इच्छा, भविष्य के सुख की इच्छा न करना और दुःख की चिन्ता न करना -॥9-11॥   |   mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 9-11
 
 
श्लोक  12.220.9-11 
तेषां लिङ्गानि वक्ष्यामि येषां समुदयो दम:।
अकार्पण्यमसंरम्भ: संतोष: श्रद्दधानता॥ ९॥
अक्रोध आर्जवं नित्यं नातिवादोऽभिमानिता।
गुरुपूजानसूया च दया भूतेष्वपैशुनम्॥ १०॥
जनवादमृषावादस्तुतिनिन्दाविवर्जनम्।
साधुकामश्च स्पृहयेन्नायतिं प्रत्ययेषु च॥ ११॥
 
 
अनुवाद
अब मैं उन लक्षणों का वर्णन करूँगा, जिनका अपना-अपना कारण है। कृपणता का अभाव, उत्साह का अभाव, संतोष, श्रद्धा, क्रोध का अभाव, नित्य सरलता, अधिक न बोलना, अभिमान का त्याग, गुरु की सेवा, किसी के गुणों में दोष न देखना, सब प्राणियों पर दया करना, किसी की चुगली न करना, लोक-लाज, मिथ्याभाषण और निन्दा का त्याग, सत्पुरुषों की संगति की इच्छा, भविष्य के सुख की इच्छा न करना और दुःख की चिन्ता न करना -॥9-11॥
 
Now I will describe those symptoms, which have their own cause in origin. Absence of miserliness, absence of excitement, contentment, faith, absence of anger, daily simplicity, not talking too much, renouncing pride, service to the Guru, not finding fault in anyone's qualities, being kind to all living beings, not gossiping about anyone, renouncing publicism, false speaking and slander, desiring the company of good men and not yearning for future happiness and not worrying about sorrow -॥ 9-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)