श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.220.8 
आश्रमेषु च सर्वेषु दम एव विशिष्यते।
यच्च तेषु फलं धर्मे भूयो दान्ते तदुच्यते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
चारों आश्रमों में संयम को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। सभी आश्रमों में धर्म का पालन करने से जो फल मिलता है, संयमी पुरुष को वे लाभ और भी अधिक मात्रा में प्राप्त होते हैं ॥8॥
 
In all the four ashramas, self-restraint is considered to be the best. The rewards that one gets by following the Dharma in all the ashramas, a person who is self-restrained gets those benefits in even greater quantity. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)