Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.220.7: जिन प्राणियों ने अपने मन और इंद्रियों को वश में नहीं किया है, उनसे सभी प्राणी उसी प्रकार सदैव भयभीत रहते हैं, जैसे वे बाघ जैसे मांसाहारी पशुओं से भयभीत रहते हैं। ऐसे अनियंत्रित मनुष्यों के उच्छृंखल व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए भगवान ब्रह्मा ने राजा की रचना की। 7. | mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्रव्याद्भॺ इव भूतानामदान्तेभ्य: सदा भयम्।
तेषां विप्रतिषेधार्थं राजा सृष्ट: स्वयम्भुवा॥ ७॥
अनुवाद
जिन प्राणियों ने अपने मन और इंद्रियों को वश में नहीं किया है, उनसे सभी प्राणी उसी प्रकार सदैव भयभीत रहते हैं, जैसे वे बाघ जैसे मांसाहारी पशुओं से भयभीत रहते हैं। ऐसे अनियंत्रित मनुष्यों के उच्छृंखल व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए भगवान ब्रह्मा ने राजा की रचना की। 7.
All living beings always fear those who have not controlled their mind and senses, just as they fear carnivorous animals like tigers. To control the disorderly behaviour of such unruly human beings, Lord Brahma created the king. 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥