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mahabharat 12.220.6: तेजस को संयम से नियंत्रित किया जाता है। जो व्यक्ति संयम से रहित है, तथा रजोगुणी और तीव्र कामी है, वह उस तेजस को धारण नहीं कर सकता और काम, क्रोध आदि अनेक शत्रुओं को सदैव अपने से पृथक अनुभव करता है। ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.220.6 
तेजो दमेन ध्रियते तन्न तीक्ष्णोऽधिगच्छति।
अमित्रांश्च बहून् नित्यं पृथगात्मनि पश्यति॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तेजस को संयम से नियंत्रित किया जाता है। जो व्यक्ति संयम से रहित है, तथा रजोगुणी और तीव्र कामी है, वह उस तेजस को धारण नहीं कर सकता और काम, क्रोध आदि अनेक शत्रुओं को सदैव अपने से पृथक अनुभव करता है। ॥6॥
 
Tejas is held in check by self-control. The person who lacks control, and is in the mode of passion and intense lust, cannot hold on to that Tejas and always feels many enemies like lust, anger, etc., as separate from himself. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)