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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन
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श्लोक 5
श्लोक
12.220.5
सुखं दान्त: प्रस्वपिति सुखं च प्रतिबुद्धॺते।
सुखं लोके विपर्येति मनश्चास्य प्रसीदति॥ ५॥
अनुवाद
नियमों का पालन करने वाला मनुष्य सुखपूर्वक सोता है, सुखपूर्वक उठता है, सुखपूर्वक संसार में विचरण करता है और उसका मन भी प्रसन्न रहता है ॥5॥
A man who follows the rules sleeps comfortably, wakes up comfortably, moves around in the world comfortably and his mind also remains happy. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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