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mahabharat 12.220.4: दम' शक्ति को बढ़ाता है। 'दम' को परम पवित्र कहा गया है। जो व्यक्ति अपने मन और इंद्रियों को वश में कर लेता है, वह पापों और भय से मुक्त होकर 'महत्' पद को प्राप्त करता है। ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.220.4 
दमस्तेजो वर्धयति पवित्रं दम उच्यते।
विपाप्मा निर्भयो दान्त: पुरुषो विन्दते महत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
दम' शक्ति को बढ़ाता है। 'दम' को परम पवित्र कहा गया है। जो व्यक्ति अपने मन और इंद्रियों को वश में कर लेता है, वह पापों और भय से मुक्त होकर 'महत्' पद को प्राप्त करता है। ॥4॥
 
'Dam' increases the energy. 'Dam' is said to be the most sacred. A person who controls his mind and senses becomes free from sins and fear and attains the state of 'Mahat'. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)