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mahabharat 12.220.2: भीष्मजी बोले - युधिष्ठिर! जो वृद्ध पुरुष एकाग्रचित्त होकर वेदार्थ का मनन करते हैं, वे प्रायः सभी जातियों के लिए और विशेषतः ब्राह्मणों के लिए मन और इन्द्रियों के संयम रूप 'दम' की स्तुति करते हैं॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.220.2 
भीष्म उवाच
दममेव प्रशंसन्ति वृद्धा: श्रुतिसमाधय:।
सर्वेषामेव वर्णानां ब्राह्मणस्य विशेषत:॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - युधिष्ठिर! जो वृद्ध पुरुष एकाग्रचित्त होकर वेदार्थ का मनन करते हैं, वे प्रायः सभी जातियों के लिए और विशेषतः ब्राह्मणों के लिए मन और इन्द्रियों के संयम रूप 'दम' की स्तुति करते हैं॥2॥
 
Bhishmaji said – Yudhishthir! Elderly men who contemplate Vedartha with concentration, generally praise 'Dam' in the form of control of mind and senses for all castes and especially for Brahmins. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)