Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.220.18: किसी के दोष न देखना, हृदय में क्षमा का भाव रखना, शांति, संतोष, मधुर वचन बोलना, सत्य का भान न होना, दान और कर्म में परिश्रम - ये सद्गुण हैं। दुष्ट मनुष्य इस मार्ग पर नहीं चलते। 18॥ | mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
किसी के दोष न देखना, हृदय में क्षमा का भाव रखना, शांति, संतोष, मधुर वचन बोलना, सत्य का भान न होना, दान और कर्म में परिश्रम - ये सद्गुण हैं। दुष्ट मनुष्य इस मार्ग पर नहीं चलते। 18॥
Not seeing anyone's faults, having a feeling of forgiveness in the heart, peace, contentment, speaking sweet words, not being aware of truth, charity and hard work in action - these are virtues. Evil men do not walk on this path. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥