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mahabharat 12.220.16: जो बहुत धन पाकर हर्षित नहीं होता और संकट में पड़कर शोक नहीं करता, वह सूक्ष्म बुद्धि वाला और अपनी इन्द्रियों को वश में रखने वाला ब्राह्मण कहा गया है ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.220.16 
न हृष्यति महत्यर्थे व्यसने च न शोचति।
स वै परिमितप्रज्ञ: स दान्तो द्विज उच्यते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जो बहुत धन पाकर हर्षित नहीं होता और संकट में पड़कर शोक नहीं करता, वह सूक्ष्म बुद्धि वाला और अपनी इन्द्रियों को वश में रखने वाला ब्राह्मण कहा गया है ॥16॥
 
He who does not become elated on acquiring great wealth and does not lament on being in a crisis is said to be a Brahmin who is endowed with a subtle intellect and has controlled his senses. ॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)