Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.220.12-13h: जितेन्द्रिय पुरुष किसी से वैर नहीं करता। वह सबके साथ अच्छा व्यवहार करता है। वह निन्दा और स्तुति में समभाव रखने वाला, गुणवान, विनम्र, प्रसन्न, धैर्यवान और दोषों का दमन करने में समर्थ होता है। वह इस लोक में सम्मान पाता है और मृत्यु के बाद स्वर्ग को जाता है। 12 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जितेन्द्रिय पुरुष किसी से वैर नहीं करता। वह सबके साथ अच्छा व्यवहार करता है। वह निन्दा और स्तुति में समभाव रखने वाला, गुणवान, विनम्र, प्रसन्न, धैर्यवान और दोषों का दमन करने में समर्थ होता है। वह इस लोक में सम्मान पाता है और मृत्यु के बाद स्वर्ग को जाता है। 12 1/2॥
A Jitendriya man does not have enmity with anyone. He behaves well with everyone. He is equanimous in criticizing and praising, virtuous, polite, cheerful, patient and capable of suppressing faults. He gets respect in this world and goes to heaven after death. 12 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥