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mahabharat 12.220.1: युधिष्ठिर ने पूछा, "भारत! मनुष्य किस उपाय से सुख प्राप्त करता है, किस उपाय से दुःख पाता है तथा किस उपाय से वह सिद्ध की भाँति निर्भय होकर संसार में विचरण करता है?"   |   mahabharat अध्याय 12.220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 220: श्वेतकेतु और सुवर्चलाका विवाह, दोनों पति-पत्नीका अध्यात्मविषयक संवाद तथा गार्हस्थ्य-धर्मका पालन करते हुए ही उनका परमात्माको प्राप्त होना एवं दमकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.220.1 
युधिष्ठिर उवाच
किं कुर्वन् सुखमाप्नोति किं कुर्वन् दु:खमाप्नुयात्।
किं कुर्वन्निर्भयो लोके सिद्धश्चरति भारत॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "भारत! मनुष्य किस उपाय से सुख प्राप्त करता है, किस उपाय से दुःख पाता है तथा किस उपाय से वह सिद्ध की भाँति निर्भय होकर संसार में विचरण करता है?"
 
Yudhishthira asked, "Bharat! By what means does a man attain happiness, by what does he suffer and by what means does he move about in the world fearlessly like a Siddha?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)