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स त्वं यज्ञैर्महाराज यजस्व बहुदक्षिणै:।
यथैवेन्द्रो मनुष्येन्द्र चिराय विगतज्वर:॥ १३॥
अनुवाद
महाराज! हे नरेन्द्र! आप भी इन्द्र के समान चिन्ता और शोक से मुक्त होकर दीर्घकाल तक बहुत-सी दक्षिणा सहित यज्ञ करते रहें।॥13॥
'Maharaj! O Narendra! You too should be free from worries and sorrows like Indra and continue to perform yagnas with lots of dakshina for a long time.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥