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mahabharat 12.22.10: नरेन्द्र! क्षत्रिय धर्म के अनुसार तुमने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करके राज्य प्राप्त कर लिया है। अब अपने मन को वश में करो और यज्ञ तथा दान में लगो। 10॥   |   mahabharat अध्याय 12.22: क्षत्रियधर्मकी प्रशंसा करते हुए अर्जुनका पुन: राजा युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 22: क्षत्रियधर्मकी प्रशंसा करते हुए अर्जुनका पुन: राजा युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.22.10 
जित्वारीन् क्षत्रधर्मेण प्राप्य राज्यमकण्टकम्।
विजितात्मा मनुष्येन्द्र यज्ञदानपरो भव॥ १०॥
 
 
अनुवाद
नरेन्द्र! क्षत्रिय धर्म के अनुसार तुमने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करके राज्य प्राप्त कर लिया है। अब अपने मन को वश में करो और यज्ञ तथा दान में लगो। 10॥
 
'Narendra! According to Kshatriya Dharma, you have won the kingdom by conquering your enemies. Now control your mind and engage in yagya and charity. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)