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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान
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श्लोक d2
श्लोक
12.219.d2
जनको जनदेवस्तु कर्माण्याधाय चात्मनि।
सर्वभावमनुप्राप्य भावेन विचचार स:॥
अनुवाद
जनकवंश के राजा जनदेव ने अपने कर्मों को ईश्वर में स्थापित करके परब्रह्म को प्राप्त किया और उसी भावना से सर्वत्र विचरण किया।
King Jandev of Janak dynasty, after establishing his deeds in God, attained the Supreme Being and roamed everywhere with the same feeling.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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