श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक d15
 
 
श्लोक  12.219.d15 
इत्युक्त्वा भगवांश्चैनं तत्रैवान्तरधीयत।
एतत् ते कथितं राजन् किं भूय: श्रोतुमिच्छसि॥ )
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर भगवान श्रीहरि वहाँ से अन्तर्धान हो गए। उन्होंने कहा, "हे राजन! मैंने यह वृत्तांत तुम्हें सुना दिया है। अब तुम और क्या सुनना चाहते हो?"
 
After saying this to him, Lord Shri Hari disappeared from there. O King! I have narrated this episode to you. What else do you want to hear?
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि पञ्चशिखवाक्यं नाम एकोनविंशत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २१९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें पंचशिखका उपदेशनामक दो सौ उन्नीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २१९॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १५ श्लोक मिलाकर कुल ६७ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)