Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.219.d14: इसके साथ ही उन्होंने राजा को अपना वास्तविक रूप दिखाया और उन्हें वरदान देते हुए पुनः कहा - 'हे मनुष्यों के स्वामी! तुम्हारा मन शुभ भावना से धर्म में तत्पर रहे और तुम्हारी बुद्धि सत्य के ज्ञान से शुद्ध हो। तुम सदैव सांसारिक सुखों से विरक्त रहो और सत्य के मार्ग पर अडिग रहो। तुम्हारा कल्याण हो। अब मैं जाता हूँ।' | mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसके साथ ही उन्होंने राजा को अपना वास्तविक रूप दिखाया और उन्हें वरदान देते हुए पुनः कहा - 'हे मनुष्यों के स्वामी! तुम्हारा मन शुभ भावना से धर्म में तत्पर रहे और तुम्हारी बुद्धि सत्य के ज्ञान से शुद्ध हो। तुम सदैव सांसारिक सुखों से विरक्त रहो और सत्य के मार्ग पर अडिग रहो। तुम्हारा कल्याण हो। अब मैं जाता हूँ।'
Along with this, he showed his true form to the king and while giving him a boon, he said again - 'O Lord of men! May your mind be devoted to religion with good intentions and may your intellect be purified in the knowledge of truth. Always remain detached from worldly pleasures and remain steadfast on the path of truth. May you prosper. Now I am leaving.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥