Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.219.d12: मेरे पास आत्म-ज्ञान की अपार सम्पदा है; इसलिए अब मुझे कुछ भी प्राप्त करने को शेष नहीं है। यदि यह मिथिला नगरी जल भी जाए, तो भी मेरा कुछ भी नहीं जलेगा।' | mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अनन्तं बत मे वित्तं भाव्यं मे नास्ति किंचन।
मिथिलायां प्रदीप्तायां न मे किंचन दह्यते॥
अनुवाद
मेरे पास आत्म-ज्ञान की अपार सम्पदा है; इसलिए अब मुझे कुछ भी प्राप्त करने को शेष नहीं है। यदि यह मिथिला नगरी जल भी जाए, तो भी मेरा कुछ भी नहीं जलेगा।'
'I have the infinite wealth of self-knowledge; therefore, there is nothing left for me to achieve. Even if this city of Mithila burns down, nothing of mine will burn.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥