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mahabharat 12.219.d11: मिथिला को जलता हुआ देखकर राजा को तनिक भी चिन्ता नहीं हुई, जब लोगों ने उनसे पूछा, तो उन्होंने यह बताया -॥   |   mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.219.d11 
प्रदीप्यमानां मिथिलां दृष्ट्वा राजा न कम्पित:।
जनै: स परिपृष्टस्तु वाक्यमेतदुवाच ह॥
 
 
अनुवाद
मिथिला को जलता हुआ देखकर राजा को तनिक भी चिन्ता नहीं हुई, जब लोगों ने उनसे पूछा, तो उन्होंने यह बताया -॥
 
Seeing Mithila burning, the king was not at all perturbed. When people asked him, he told them this -॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)