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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान
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श्लोक 8
श्लोक
12.219.8
आकाशोवायुरूष्मा च स्नेहो यश्चापि पार्थिव:।
एष पञ्चसमाहार: शरीरमपि नैकधा॥ ८॥
अनुवाद
आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी - इन पाँच तत्वों के संयोग से अनेक प्रकार के शरीरों की रचना हुई है ।8॥
Many types of bodies have been created from the combination of these five elements – sky, air, fire, water and earth. 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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