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mahabharat 12.219.44: जो इस मोक्षविद्या को जानता है और आत्मा का ध्यानपूर्वक अध्ययन करता है, वह जल में कमल के पत्ते के समान अपने कर्मों के बुरे परिणामों से कभी प्रभावित नहीं होता ॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.219.44 
इमां च यो वेद विमोक्षबुद्धि-
मात्मानमन्विच्छति चाप्रमत्त:।
न लिप्यते कर्मफलैरनिष्टै:
पत्रं बिसस्येव जलेन सिक्तम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जो इस मोक्षविद्या को जानता है और आत्मा का ध्यानपूर्वक अध्ययन करता है, वह जल में कमल के पत्ते के समान अपने कर्मों के बुरे परिणामों से कभी प्रभावित नहीं होता ॥ 44॥
 
He who knows this science of salvation and carefully studies the Self is never affected by the evil results of his actions, like a lotus leaf in water. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)