Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.219.43: जब जीवात्मा ब्रह्म में लीन हो जाता है, तब उसका नाम और रूप किसी भी प्रकार से ज्ञात नहीं होता। ऐसी स्थिति में, मृत्यु के बाद जीवात्मा अपनी पहचान कैसे बनाए रखेगा?॥ 43॥ | mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं सति कुत: संज्ञा प्रेत्यभावे पुनर्भवेत्।
प्रतिसम्मिश्रिते जीवेऽगृह्यमाणे च सर्वत:॥ ४३॥
अनुवाद
जब जीवात्मा ब्रह्म में लीन हो जाता है, तब उसका नाम और रूप किसी भी प्रकार से ज्ञात नहीं होता। ऐसी स्थिति में, मृत्यु के बाद जीवात्मा अपनी पहचान कैसे बनाए रखेगा?॥ 43॥
When a soul merges with Brahman, its name and form cannot be perceived in any way. In such a condition, how will the soul retain its identity after death?॥ 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥