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mahabharat 12.219.42: जैसे नदियाँ समुद्र में मिलकर अपना नाम और रूप त्याग देती हैं, तथा जैसे बड़ी नदियाँ छोटी नदियों को अपने में समा लेती हैं, वैसे ही आत्मा परमात्मा में लीन हो जाती है। यही मोक्ष है॥42॥   |   mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.219.42 
यथार्णवगता नद्यो व्यक्तीर्जहति नाम च।
नदाश्च ता नियच्छन्ति तादृश: सत्त्वसंक्षय:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
जैसे नदियाँ समुद्र में मिलकर अपना नाम और रूप त्याग देती हैं, तथा जैसे बड़ी नदियाँ छोटी नदियों को अपने में समा लेती हैं, वैसे ही आत्मा परमात्मा में लीन हो जाती है। यही मोक्ष है॥42॥
 
Just as rivers merge into the ocean and give up their names and personalities (forms), and just as big rivers absorb smaller rivers into themselves, similarly the soul merges into the Supreme Soul. This is salvation.॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)