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एवं सति क उच्छेद: शाश्वतो वा कथं भवेत्।
स्वभावाद् वर्तमानेषु सर्वभूतेषु हेतुत:॥ ४१॥
अनुवाद
ऐसी स्थिति में आत्मा का नाश कैसे हो सकता है? अथवा वह प्रकृति के अनुसार कार्य करने वाले पंचमहाभूतों के साथ नित्य संपर्क में कैसे रह सकता है? 41॥
How can the soul be destroyed in such a situation? Or how can he remain in eternal contact with the five great elements which are purposefully acting according to nature? 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥