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mahabharat 12.219.38: सुषुप्ति काल में स्वप्नदर्शी को वर्तमान दुःख का यथावत् अनुभव नहीं होता, इसलिए सुषुप्ति काल में भी तमोगुण के कारण उसे मिथ्या सुख का अनुभव होता है ॥38॥   |   mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.219.38 
यद् यदागमसंयुक्तं न कृच्छ्रमनुपश्यति।
अथ तत्राप्युपादत्ते तमोऽव्यक्तमिवानृतम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
सुषुप्ति काल में स्वप्नदर्शी को वर्तमान दुःख का यथावत् अनुभव नहीं होता, इसलिए सुषुप्ति काल में भी तमोगुण के कारण उसे मिथ्या सुख का अनुभव होता है ॥38॥
 
During the period of deep sleep, the dreamer does not experience the present sorrow as it is. That is why he experiences false happiness due to Tamo quality even during the period of deep sleep. 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)