Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.219.37: गहरी नींद के समय जब मन तामस प्रकृति से अभिभूत होकर शीघ्र ही अपनी वृत्तियों और हलके स्वभाव को मारकर इन्द्रियों के व्यापार को कुछ देर के लिए रोक देता है, उस समय शरीर में जो सुख का अनुभव होता है, उसे विद्वान पुरुष तामस सुख कहते हैं ॥37॥ | mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गहरी नींद के समय जब मन तामस प्रकृति से अभिभूत होकर शीघ्र ही अपनी वृत्तियों और हलके स्वभाव को मारकर इन्द्रियों के व्यापार को कुछ देर के लिए रोक देता है, उस समय शरीर में जो सुख का अनुभव होता है, उसे विद्वान पुरुष तामस सुख कहते हैं ॥37॥
During the period of deep sleep, when the mind gets overwhelmed by the Tamasic nature and quickly kills its tendencies and light nature and stops the business of the senses for a while, the happiness that is experienced in the body at that time is called Tamasic happiness by learned men. 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥