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mahabharat 12.219.36: प्रथम जाग्रत अवस्था में पूर्व इच्छा से दर्शन, श्रवण आदि के द्वारा शब्द आदि विषयों को प्राप्त करने वाला स्वप्नदर्शी ग्यारह सूक्ष्म इन्द्रियों को देखता हुआ विषयों के सान्निध्य का अनुभव करता हुआ सत्त्व आदि तीन गुणों से युक्त हो जाता है और अपनी इच्छानुसार शरीर के भीतर विचरण करता रहता है ॥36॥   |   mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.219.36 
इन्द्रियाण्यपि सूक्ष्माणि दृष्ट्वा पूर्वश्रुतागमात्।
चिन्तयन्नानुपर्येति त्रिभिरेवान्वितो गुणै:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
प्रथम जाग्रत अवस्था में पूर्व इच्छा से दर्शन, श्रवण आदि के द्वारा शब्द आदि विषयों को प्राप्त करने वाला स्वप्नदर्शी ग्यारह सूक्ष्म इन्द्रियों को देखता हुआ विषयों के सान्निध्य का अनुभव करता हुआ सत्त्व आदि तीन गुणों से युक्त हो जाता है और अपनी इच्छानुसार शरीर के भीतर विचरण करता रहता है ॥36॥
 
In the first waking state, due to pre-desire acquiring objects like words etc. through seeing, hearing etc., the dreamer, seeing the eleven subtle senses, having the feeling of being in the company of objects, gets filled with the three qualities of sattva etc. and keeps moving around within the body as per his wish. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)