Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.219.35: तमोगुण से उत्पन्न सुषुप्ति काल में इन्द्रियाँ अपने कारण में लीन होने के कारण विषयों का अनुभव नहीं कर पातीं, किन्तु उनका नाश नहीं होता। विषयों को एक साथ देखने की जो शक्ति उनमें होती है, वह केवल सांसारिक व्यवहार में ही दिखाई देती है (सुषुप्ति काल में नहीं)।॥35॥ | mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तेषामयुगपद्भाव उच्छेदो नास्ति तामसे।
आस्थितो युगपद्भावो व्यवहार: स लौकिक:॥ ३५॥
अनुवाद
तमोगुण से उत्पन्न सुषुप्ति काल में इन्द्रियाँ अपने कारण में लीन होने के कारण विषयों का अनुभव नहीं कर पातीं, किन्तु उनका नाश नहीं होता। विषयों को एक साथ देखने की जो शक्ति उनमें होती है, वह केवल सांसारिक व्यवहार में ही दिखाई देती है (सुषुप्ति काल में नहीं)।॥35॥
In the deep sleep period caused by the Tamoguna, the senses cannot perceive objects because they merge in their cause, but they are not destroyed. The power they have to perceive objects simultaneously is visible only in worldly behavior (not in the deep sleep period).॥ 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥