श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.219.34 
स्वकर्मयुगपद्भावो दशस्वेतेषु तिष्ठति।
चित्तमेकादशं विद्धि बुद्धिर्द्वादशमी भवेत्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
ये दसों इन्द्रियाँ अपने-अपने विषयों को एक साथ देखने की शक्ति रखती हैं। ग्यारहवाँ मन और बारहवीं बुद्धि - इन्हें इन्द्रियों का सहायक समझना चाहिए ॥34॥
 
These ten senses have the power to perceive their respective objects simultaneously. The eleventh mind and the twelfth intellect – these should be considered as assistants to the senses. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)