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mahabharat 12.219.32: शब्द का आधार श्रवणेन्द्रिय है और श्रवणेन्द्रिय का आधार आकाश है; अतः वह आकाशस्वरूप है। ऐसी स्थिति में शब्द का अनुभव करते समय आकाश और श्रोता दोनों ही ज्ञान या अज्ञान के विषय नहीं होते। 32॥   |   mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.219.32 
श्रोत्रं व्योमाश्रितं भूतं शब्द: श्रोत्रं समाश्रित:।
नोभयं शब्दविज्ञाने विज्ञानस्येतरस्य वा॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
शब्द का आधार श्रवणेन्द्रिय है और श्रवणेन्द्रिय का आधार आकाश है; अतः वह आकाशस्वरूप है। ऐसी स्थिति में शब्द का अनुभव करते समय आकाश और श्रोता दोनों ही ज्ञान या अज्ञान के विषय नहीं होते। 32॥
 
The basis of the word is the sense of hearing and the basis of the sense of hearing is the sky; Hence he is the form of sky. In such a situation, while experiencing the word, both the sky and the listener are not the subject of knowledge or ignorance. 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)