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mahabharat 12.219.31: शरीर या मन में जो अविवेकी, अज्ञेय और आसक्तियुक्त भाव उत्पन्न होते हैं, उन्हें तमोगुण के कारण ही समझना चाहिए ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.219.31 
अथ यन्मोहसंयुक्तं काये मनसि वा भवेत्।
अप्रतर्क्यमविज्ञेयं तमस्तदुपधारयेत्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
शरीर या मन में जो अविवेकी, अज्ञेय और आसक्तियुक्त भाव उत्पन्न होते हैं, उन्हें तमोगुण के कारण ही समझना चाहिए ॥31॥
 
The irrational, unknowable and attachment-combined feelings that arise in the body or mind should be considered to be caused by Tamoguna. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)