Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.219.29: इनमें से जो प्रेम के संयोग से शरीर या मन में उत्पन्न होता है, वह सात्त्विक भाव है और उसे सत्त्वगुण की वृद्धि समझना चाहिए ॥29॥   |   mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.219.29 
अत्र यत् प्रीतिसंयुक्तं काये मनसि वा भवेत् ।
वर्तते सात्त्विको भाव इत्यपेक्षेत तत् तथा॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इनमें से जो प्रेम के संयोग से शरीर या मन में उत्पन्न होता है, वह सात्त्विक भाव है और उसे सत्त्वगुण की वृद्धि समझना चाहिए ॥29॥
 
Among these, the one that arises in the body or mind due to the combination of love is a sattvik feeling and it should be considered as an increase in sattva guna. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)