श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.219.28 
अविवेकस्तथा मोह: प्रमाद: स्वप्नतन्द्रिता।
कथंचिदपि वर्तन्ते विविधास्तामसा गुणा:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
अविवेक, मोह, प्रमाद, स्वप्न और आलस्य - ये जो भी हों, ये सभी तामस गुण के ही विभिन्न रूप हैं।
 
Indiscretion, delusion, negligence, dreams and laziness - whatever they may be, they are all various forms of the Tamas Guna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)