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mahabharat 12.219.27: असंतोष, क्रोध, शोक, लोभ और असहिष्णुता - चाहे किसी कारणवश हो या बिना कारण के - ये रजोगुण के लक्षण हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.219.27 
अतुष्टि: परितापश्च शोको लोभस्तथाऽक्षमा।
लिङ्गानि रजसस्तानि दृश्यन्ते हेत्वहेतुत:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
असंतोष, क्रोध, शोक, लोभ और असहिष्णुता - चाहे किसी कारणवश हो या बिना कारण के - ये रजोगुण के लक्षण हैं।
 
Dissatisfaction, anger, grief, greed and intolerance—whether due to some reason or without any reason—are the signs of Rajoguna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)