Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.219.22: वाणी इन्द्रिय विशेष शब्दों के उच्चारण के लिए है। इस प्रकार पाँच कर्मेन्द्रियाँ पाँच विषयों से युक्त मानी गई हैं। मन सहित ग्यारहवीं इन्द्रिय के विषयों को बुद्धि द्वारा शीघ्र ही त्याग देना चाहिए। 22॥ | mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वाक् च शब्दविशेषार्थमिति पञ्चान्वितं विदु:।
एवमेकादशैतानि बुद्धॺाऽऽशु विसृजेन्मन:॥ २२॥
अनुवाद
वाणी इन्द्रिय विशेष शब्दों के उच्चारण के लिए है। इस प्रकार पाँच कर्मेन्द्रियाँ पाँच विषयों से युक्त मानी गई हैं। मन सहित ग्यारहवीं इन्द्रिय के विषयों को बुद्धि द्वारा शीघ्र ही त्याग देना चाहिए। 22॥
The sense of speech is for pronouncing particular words. In this way, the five karmendriyas are considered to be comprised of five subjects. The objects of the eleventh senses including the mind should be quickly abandoned by the intellect. 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥