श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.219.21 
हस्तौ कर्मेन्द्रियं ज्ञेयमथ पादौ गतीन्द्रियम्।
प्रजनानन्दयो: शेफो निसर्गे पायुरिन्द्रियम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
दोनों हाथों की कर्मेन्द्रियों को जानना चाहिए, दोनों पैर चलने की कर्मेन्द्रियाँ हैं। मैथुन का उद्देश्य संतानोत्पत्ति और कामसुख की प्राप्ति है। रज नामक इन्द्रिय का कार्य मलत्याग करना है। 21॥
 
One should know the working senses of both the hands, both the legs are the working senses of walking. Sex is for procreation and achieving sexual pleasure. The function of the sense organ called good is to defecate. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)