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mahabharat 12.219.20: बुद्धि में स्थित मन सहित पाँच ज्ञानेन्द्रियों का वर्णन करके अब मैं पाँच कर्मेन्द्रियों का वर्णन करूँगा। जिनसे प्राण छठा कहा गया है ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.219.20 
पञ्चज्ञानेन्द्रियाण्युक्त्वा मन:षष्ठानि चेतसि।
बलषष्ठानि वक्ष्यामि पञ्चकर्मेन्द्रियाणि तु॥ २०॥
 
 
अनुवाद
बुद्धि में स्थित मन सहित पाँच ज्ञानेन्द्रियों का वर्णन करके अब मैं पाँच कर्मेन्द्रियों का वर्णन करूँगा। जिनसे प्राण छठा कहा गया है ॥20॥
 
After describing the five sense organs including the mind located in the intellect, I will now describe the five action senses. With whom the life force is said to be sixth. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)