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mahabharat 12.219.17: जो मोक्ष के लिए प्रयत्नशील हैं, उन्हें अपने सभी कार्यों में अहंकार, आसक्ति, आसक्ति और कामना का त्याग कर देना चाहिए। जो लोग इनका त्याग किए बिना (शम, दम आदि साधनों का उपयोग करने में तत्पर रहते हैं) अपने आपको मिथ्या रूप से विनम्र बताते हैं, वे अज्ञान आदि दुःखदायी क्लेशों को भोगते हैं॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.219.17 
त्याग एव हि सर्वेषां युक्तानामपि कर्मणाम्।
नित्यं मिथ्याविनीतानां क्लेशो दु:खवहो मत:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जो मोक्ष के लिए प्रयत्नशील हैं, उन्हें अपने सभी कार्यों में अहंकार, आसक्ति, आसक्ति और कामना का त्याग कर देना चाहिए। जो लोग इनका त्याग किए बिना (शम, दम आदि साधनों का उपयोग करने में तत्पर रहते हैं) अपने आपको मिथ्या रूप से विनम्र बताते हैं, वे अज्ञान आदि दुःखदायी क्लेशों को भोगते हैं॥17॥
 
Those who strive for liberation should give up ego, attachment, attachment and desire in all their actions. Those who falsely claim to be humble (ready to use the means like Sham, Dam etc.) without renouncing them, they suffer painful tribulations like ignorance etc. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)