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mahabharat 12.219.14: जो लोग गुणों के संयोग से शरीर को ही आत्मा मानते हैं, वे मिथ्या ज्ञान के कारण अनन्त दुःख भोगते हैं और उनकी परम्परा कभी विश्राम नहीं करती ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.219.14 
इमं गुणसमाहारमात्मभावेन पश्यत:।
असम्यग्दर्शनैर्दु:खमनन्तं नोपशाम्यति॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जो लोग गुणों के संयोग से शरीर को ही आत्मा मानते हैं, वे मिथ्या ज्ञान के कारण अनन्त दुःख भोगते हैं और उनकी परम्परा कभी विश्राम नहीं करती ॥14॥
 
Those who consider the body to be the soul as a combination of gunas, they suffer eternal sorrows due to false knowledge and their tradition never rests. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)