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mahabharat 12.219.13: श्रोतारूपी इन्द्रियों में अपने विषयों को लीन (त्याग) करके मनुष्य सम्पूर्ण तत्त्वों के वास्तविक स्वरूप में मोक्ष को प्राप्त होता है। उस निश्चय को अत्यंत शुद्ध, उत्तम ज्ञान और अविनाशी महान ब्रह्मपद कहते हैं। 13॥   |   mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.219.13 
तेषु कर्मविसर्गश्च सर्वतत्त्वार्थनिश्चय:।
तमाहु: परमं शुक्रं बुद्धिरित्यव्ययं महत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
श्रोतारूपी इन्द्रियों में अपने विषयों को लीन (त्याग) करके मनुष्य सम्पूर्ण तत्त्वों के वास्तविक स्वरूप में मोक्ष को प्राप्त होता है। उस निश्चय को अत्यंत शुद्ध, उत्तम ज्ञान और अविनाशी महान ब्रह्मपद कहते हैं। 13॥
 
By immersing (renouncing) their objects in the senses like listener, one attains salvation in the true form of all the elements. That determination is called extremely pure, excellent knowledge and imperishable great Brahmapad. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)