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mahabharat 12.219.10: श्रोत्र, त्वचा, जिह्वा, नेत्र और नासिका ये पाँच इन्द्रियाँ हैं। मन सहित शब्द आदि गुण इन इन्द्रियों के विषय हैं। 10॥   |   mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.219.10 
श्रवणं स्पर्शनं जिह्वा दृष्टिर्नासा तथैव च।
इन्द्रियाणीति पञ्चैते चित्तपूर्वं गता गुणा:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
श्रोत्र, त्वचा, जिह्वा, नेत्र और नासिका ये पाँच इन्द्रियाँ हैं। मन सहित शब्द आदि गुण इन इन्द्रियों के विषय हैं। 10॥
 
Hearing, skin, tongue, eyes and nose are the five senses. Words and other qualities, combined with the mind, are the subjects of these senses. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)