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mahabharat 12.219.1: भीष्मजी कहते हैं - राजन! महर्षि पंचशिख के इस प्रकार उपदेश देने के बाद जनदेव जनक ने उनसे पुनः मृत्यु के बाद आत्मा के अस्तित्व अथवा नाश के विषय में पूछा॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.219.1 
भीष्म उवाच
जनको जनदेवस्तु ज्ञापित: परमर्षिणा।
पुनरेवानुपप्रच्छ साम्पराये भवाभवौ॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन! महर्षि पंचशिख के इस प्रकार उपदेश देने के बाद जनदेव जनक ने उनसे पुनः मृत्यु के बाद आत्मा के अस्तित्व अथवा नाश के विषय में पूछा॥1॥
 
Bhishmaji says – King! After Maharishi Panchashikha gave this sermon, Jandev Janak again asked him about the existence or destruction of the soul after death. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)