Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.218.5: शास्त्रों के अनुयायी राजा जनदेव उन आचार्यों के इस निश्चित सिद्धांत से विशेष संतुष्ट नहीं थे कि इस शरीर को छोड़ने के बाद आत्मा का अस्तित्व बना रहता है या नहीं, अथवा शरीर को छोड़ने के बाद उसका पुनर्जन्म होता है या नहीं ॥5॥ | mahabharat अध्याय 12.218: राजा जनकके दरबारमें पञ्चशिखका आगमन और उनके द्वारा नास्तिक मतोंके निराकरणपूर्वक शरीरसे भिन्न आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तेषां प्रेत्यभावे च प्रेत्यजातौ विनिश्चये।
आगमस्थ: स भूयिष्ठमात्मतत्त्वे न तुष्यति॥ ५॥
अनुवाद
शास्त्रों के अनुयायी राजा जनदेव उन आचार्यों के इस निश्चित सिद्धांत से विशेष संतुष्ट नहीं थे कि इस शरीर को छोड़ने के बाद आत्मा का अस्तित्व बना रहता है या नहीं, अथवा शरीर को छोड़ने के बाद उसका पुनर्जन्म होता है या नहीं ॥5॥
King Jandev, a follower of the scriptures, was not particularly satisfied with the definite theory of those Acharyas about whether the soul continues to exist after leaving this body or not, or whether it is reborn after leaving the body or not. 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥