Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.218.45: इस प्रकार सभी प्राणी अच्छे-बुरे के कारण दुःखी रहते हैं। केवल शास्त्रों के वचन ही उन्हें सन्मार्ग पर वापस खींचते हैं। जैसे महावत हाथी पर लगाम लगाकर उसे नियंत्रित करता है ॥45॥ | mahabharat अध्याय 12.218: राजा जनकके दरबारमें पञ्चशिखका आगमन और उनके द्वारा नास्तिक मतोंके निराकरणपूर्वक शरीरसे भिन्न आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस प्रकार सभी प्राणी अच्छे-बुरे के कारण दुःखी रहते हैं। केवल शास्त्रों के वचन ही उन्हें सन्मार्ग पर वापस खींचते हैं। जैसे महावत हाथी पर लगाम लगाकर उसे नियंत्रित करता है ॥45॥
In this way all beings remain unhappy due to good and bad. Only the words of the scriptures pull them back on the right path. Just like the mahout controls the elephant by keeping a rein on it. ॥ 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥