Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.218.35: (आस्तिक उपर्युक्त नास्तिक मत में इस प्रकार दोष निकालते हैं:) क्षणभंगुर वैज्ञानिक की मान्यता के अनुसार जब शरीर और आत्मा क्षणभंगुर होते हैं, तब अगले क्षण का शरीर रूप, जाति, स्वभाव और उद्देश्य की दृष्टि से पिछले क्षण के शरीर से भिन्न होता है। ऐसी दशा में यह पहचान (स्मृति) नहीं हो सकती कि यह वही है। अथवा यह मानना ​​पड़ेगा कि भोग, मोक्ष आदि सब बिना इच्छा किए भी अचानक प्राप्त हो जाते हैं (उस दशा में यह भी कह सकते हैं कि मोक्ष की इच्छा करने वाला भिन्न है, साधन करने वाला भिन्न है और उससे मुक्त होने वाला भी भिन्न है)।॥ 35॥   |   mahabharat अध्याय 12.218: राजा जनकके दरबारमें पञ्चशिखका आगमन और उनके द्वारा नास्तिक मतोंके निराकरणपूर्वक शरीरसे भिन्न आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 218: राजा जनकके दरबारमें पञ्चशिखका आगमन और उनके द्वारा नास्तिक मतोंके निराकरणपूर्वक शरीरसे भिन्न आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.218.35 
यदा स्वरूपतश्चान्यो जातित: शुभतोऽर्थत:।
कथमस्मिन् स इत्येवं सर्वं वा स्यादसंहितम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
(आस्तिक उपर्युक्त नास्तिक मत में इस प्रकार दोष निकालते हैं:) क्षणभंगुर वैज्ञानिक की मान्यता के अनुसार जब शरीर और आत्मा क्षणभंगुर होते हैं, तब अगले क्षण का शरीर रूप, जाति, स्वभाव और उद्देश्य की दृष्टि से पिछले क्षण के शरीर से भिन्न होता है। ऐसी दशा में यह पहचान (स्मृति) नहीं हो सकती कि यह वही है। अथवा यह मानना ​​पड़ेगा कि भोग, मोक्ष आदि सब बिना इच्छा किए भी अचानक प्राप्त हो जाते हैं (उस दशा में यह भी कह सकते हैं कि मोक्ष की इच्छा करने वाला भिन्न है, साधन करने वाला भिन्न है और उससे मुक्त होने वाला भी भिन्न है)।॥ 35॥
 
(Theists find fault with the above mentioned atheistic view in the following manner:) According to the belief of the momentary scientist, when the body and the soul are momentary, then the body of the next moment is different from the body of the previous moment in terms of form, caste, nature and purpose. In such a condition, there cannot be any recognition (memory) that this is the same. Or it will have to be believed that all enjoyment, liberation etc. are suddenly attained without even desiring (in that condition it can also be said that the one who desires liberation is different, the one who does the means is different and the one who is liberated from it is also different).॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)