Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.218.34: वे अज्ञान आदि कारण समूह सुषुप्ति और प्रलय की गहन अवस्था में संस्कारों के रूप में विद्यमान रहते हैं। जब उनकी उपस्थिति में एक नश्वर शरीर नष्ट हो जाता है, तब पूर्वोक्त अज्ञान आदि के कारण उससे दूसरा शरीर उत्पन्न होता है। जब ज्ञान द्वारा अज्ञान आदि कारणों को जला दिया जाता है, तब शरीर के नष्ट हो जाने पर सत्त्व (बुद्धि) के क्षय रूप मोक्ष की प्राप्ति होती है, ऐसा उनका कथन है॥ 34॥ | mahabharat अध्याय 12.218: राजा जनकके दरबारमें पञ्चशिखका आगमन और उनके द्वारा नास्तिक मतोंके निराकरणपूर्वक शरीरसे भिन्न आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्मिन् गूढे च दग्धे च भिन्ने मरणधर्मिणि।
अन्योऽस्माज्जायते देहस्तमाहु: सत्त्वसंक्षयम्॥ ३४॥
अनुवाद
वे अज्ञान आदि कारण समूह सुषुप्ति और प्रलय की गहन अवस्था में संस्कारों के रूप में विद्यमान रहते हैं। जब उनकी उपस्थिति में एक नश्वर शरीर नष्ट हो जाता है, तब पूर्वोक्त अज्ञान आदि के कारण उससे दूसरा शरीर उत्पन्न होता है। जब ज्ञान द्वारा अज्ञान आदि कारणों को जला दिया जाता है, तब शरीर के नष्ट हो जाने पर सत्त्व (बुद्धि) के क्षय रूप मोक्ष की प्राप्ति होती है, ऐसा उनका कथन है॥ 34॥
Those causal groups like ignorance etc. remain present in the form of impressions in the deep state of deep sleep and pralaya. When a mortal body is destroyed in their presence, then another body is created from it due to the aforementioned ignorance etc. When the causes like ignorance etc. are burnt by knowledge, then after the destruction of the body, salvation in the form of the decay of Sattva (intellect) occurs, this is their statement.॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥