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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 218: राजा जनकके दरबारमें पञ्चशिखका आगमन और उनके द्वारा नास्तिक मतोंके निराकरणपूर्वक शरीरसे भिन्न आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.218.32 
अविद्या कर्म तृष्णा च केचिदाहु: पुनर्भवे।
कारणं लोभमोहौ तु दोषाणां तु निषेवणम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
कुछ लोग कहते हैं कि अज्ञान, कर्म, इच्छा, लोभ, मोह और बुरे व्यवहारों में लिप्तता ही पुनर्जन्म के कारण हैं ॥ 32॥
 
Some people say that ignorance, karma, desire, greed, attachment and the indulgence in bad habits are the reasons for rebirth. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)