Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.218.31: नास्तिकों ने जितने उदाहरण दिए हैं, वे सब मूर्त वस्तुओं के हैं। मूर्त जड़ वस्तुओं से ही मूर्त जड़ वस्तुएँ उत्पन्न होती हैं। उन उदाहरणों से यही सिद्ध होता है। उदाहरण के लिए, काष्ठ से अग्नि की उत्पत्ति (यदि पंचभूतों से आत्मा की उत्पत्ति या मूर्त से अमूर्त की उत्पत्ति मान ली जाए, तो पृथ्वी आदि मूर्त वस्तुओं से आकाश की उत्पत्ति भी माननी पड़ेगी, जो कि असंभव है)। आत्मा अमूर्त वस्तु है और शरीर मूर्त है; अतः मूर्त के साथ अमूर्त की समानता अथवा मूर्त तत्त्वों के संयोग से अमूर्त चेतन आत्मा की उत्पत्ति संभव नहीं है। ॥31॥ | mahabharat अध्याय 12.218: राजा जनकके दरबारमें पञ्चशिखका आगमन और उनके द्वारा नास्तिक मतोंके निराकरणपूर्वक शरीरसे भिन्न आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नन्वेते हेतव: सन्ति ये केचिन्मूर्तिसंस्थिता:।
अमूर्तस्य हि मूर्तेन सामान्यं नोपपद्यते॥ ३१॥
अनुवाद
नास्तिकों ने जितने उदाहरण दिए हैं, वे सब मूर्त वस्तुओं के हैं। मूर्त जड़ वस्तुओं से ही मूर्त जड़ वस्तुएँ उत्पन्न होती हैं। उन उदाहरणों से यही सिद्ध होता है। उदाहरण के लिए, काष्ठ से अग्नि की उत्पत्ति (यदि पंचभूतों से आत्मा की उत्पत्ति या मूर्त से अमूर्त की उत्पत्ति मान ली जाए, तो पृथ्वी आदि मूर्त वस्तुओं से आकाश की उत्पत्ति भी माननी पड़ेगी, जो कि असंभव है)। आत्मा अमूर्त वस्तु है और शरीर मूर्त है; अतः मूर्त के साथ अमूर्त की समानता अथवा मूर्त तत्त्वों के संयोग से अमूर्त चेतन आत्मा की उत्पत्ति संभव नहीं है। ॥31॥
All the examples given by atheists are of concrete objects. Only concrete inert objects are produced from concrete inert objects. This is what is proved by those examples. For example, the origin of fire from wood (if the origin of the soul from the five elements or the intangible from the concrete is accepted, then the origin of the sky from the concrete objects like earth etc. will also have to be accepted, which is impossible). The soul is an intangible object and the body is concrete; hence the similarity of the intangible with the concrete or the origin of the abstract conscious soul from the union of concrete elements is not possible. ॥31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥