Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.218.3: प्राचीन काल की कथा है, जनकवंशी राजा जनदेव मिथिला में राज्य करते थे। मृत्यु के पश्चात् वे सदैव आत्मा-सम्बन्धी धर्मों के चिंतन में लगे रहते थे।॥3॥ | mahabharat अध्याय 12.218: राजा जनकके दरबारमें पञ्चशिखका आगमन और उनके द्वारा नास्तिक मतोंके निराकरणपूर्वक शरीरसे भिन्न आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्राचीन काल की कथा है, जनकवंशी राजा जनदेव मिथिला में राज्य करते थे। मृत्यु के पश्चात् वे सदैव आत्मा-सम्बन्धी धर्मों के चिंतन में लगे रहते थे।॥3॥
It is a story of ancient times, King Jandev of Janaka dynasty ruled Mithila. After death, he always remained engaged in the contemplation of the religions related to the existence of soul.॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥