Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.218.24: आत्मा के सारस्वरूप शरीर का अभाव ही उसकी मृत्यु है। इस दृष्टि से दुःख, बुढ़ापा और नाना प्रकार के रोग, ये सब आत्मा की मृत्यु हैं (क्योंकि ये शरीर को आंशिक रूप से नष्ट कर देते हैं)। फिर भी, जो लोग आत्मा को शरीर से भिन्न मानते हैं, उनकी मान्यता अत्यन्त अतार्किक है ॥24॥ | mahabharat अध्याय 12.218: राजा जनकके दरबारमें पञ्चशिखका आगमन और उनके द्वारा नास्तिक मतोंके निराकरणपूर्वक शरीरसे भिन्न आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आत्मा के सारस्वरूप शरीर का अभाव ही उसकी मृत्यु है। इस दृष्टि से दुःख, बुढ़ापा और नाना प्रकार के रोग, ये सब आत्मा की मृत्यु हैं (क्योंकि ये शरीर को आंशिक रूप से नष्ट कर देते हैं)। फिर भी, जो लोग आत्मा को शरीर से भिन्न मानते हैं, उनकी मान्यता अत्यन्त अतार्किक है ॥24॥
The absence of the body which is the essence of the soul is its death. From this point of view, sorrow, old age and various kinds of diseases are all death of the soul (because they partially destroy the body). Still, the belief of those who consider the soul to be different from the body is very illogical. ॥24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥